कुपोषण हटाने के लिए शासकीय आंगनबाड़ी एवं स्कूलों के मध्यान्ह भोजन में अंडा शामिल करें…

कुपोषण हटाने के लिए शासकीय आंगनबाड़ी एवं स्कूलों के मध्यान्ह भोजन में अंडा शामिल करें…

कुपोषण एक वैश्विक समस्या है और हमारा देश इससे अछूता नहीं है।एक सर्वे के अनुसार भारत के 80% लोग (लगभग 100 करोड़) कुपोषण के शिकार हैं और प्रोटीन कुपोषण सबसे बड़ी समस्या है जिसमें गरीब तबके से लेकर सभ्रांत परिवारों के लोग तक शामिल हैं।हम भारतीयों का आहार करबोहाड्रेट आधारित है जबकि इसे प्रोटीन आधारित होना चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति को 1 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो शारीरिक वजन के अनुसार अपने दैनिक आहार में लेना चाहिए, बच्चों में यह 1.8 ग्राम प्रति किलो शारीरिक वजन के अनुसार होना चाहिए।ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में तो स्थिति और भी भयावह है यहाँ तो कुपोषण से भी नीचे अर्थात अतिकुपोषण की स्थिति निर्मित हो रही है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एवं इंटरनेशनल एग काउंसिल (IEC) ने अंडे को कुपोषण से लड़ने का सबसे सशक्त माध्यम माना है, क्योंकि अंडा उच्च पोषक गुणवत्ता युक्त,सस्ता एवं सहज उपलब्ध पोषक आहार है।माँ के दूध के बाद अंडा ही एकमात्र प्रोटीन का ऐसा स्त्रोत है जिसका प्रोटीन जैविक गुणांक ( Biological Value) 93.7% है, जबकि माँ के दूध का BV 100% होता है, गाय के दूध का BV 87%,भैंस के दूध का 78% एवं सभी दालों का BV 58% होता है।100 मि.ग्रा. दूध (लगभग 4.50₹)से 3.2 ग्राम प्रोटीन मिलता है जबकि 55 ग्राम के एक अंडे(लगभग 4.50₹) से 6.3 ग्राम प्रोटीन मिलता है।प्रोटीन जैविक गुणांक हमारे शरीर में पाये जाने वाले प्रोटीन एवं हमारे द्वारा भोजन में खाये जाने वाले प्रोटीन में समानता का मानक है।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन हैदराबाद (जो कि एक शासकीय संसथान है) की वर्ष 1999 में की गई अनुशंसा के अनुसार एक व्यक्ति को अपने दैनिक आहार में समस्त पोषक तत्वों की मात्रा को संतुलित करने हेतु एक वर्ष में 180 अण्डों का सेवन करना चाहिए किन्तु आज दिनाँक तक यह आंकड़ा मात्र 61 अण्डों तक ही पहुँच पाया है। हमारे देश के कई राज्यों में जैसे कि आंध्र प्रदेश,तमिलनाडु,केरल,कर्नाटक,उड़ीसा इत्यादि में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शालाओं के मध्यान्ह भोजन में प्रतिसप्ताह, प्रति छात्र/छात्रा 3-5 अंडे दिए जाते हैं जिसके कारण यहाँ बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है जबकि छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र,गुजरात इत्यादि प्रदेशों के शासकीय मध्यान्ह भोजन में अंडा नहीं दिया जाता है इस कारण इन प्रदेशों में अब “अतिकुपोषित बच्चों” की स्थिति निर्मित हो रही है। अतः उन समस्त राज्य सरकारों से, जिनके मध्यान्ह भोजन में अंडा शामिल नहीं है एवं केंद्र सरकार से मेरी करबद्ध प्रार्थना है कि इस स्वास्थ्यवर्धक एवं जनउपयोगी कार्यक्रम को यथाशीघ्र शुरू करवाएं। धन्यवाद।

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