मक्की….अभी और उछलने की तैयारी.

मक्की….अभी और उछलने की तैयारी.

नई दिल्ली, मक्की की आपूर्ति चौतरफा कमजोर पडने एवं मंडियों में स्टॉक की भारी कमी हो जाने से हरियाणा-पंजाब के लिए माल मिलना मुश्किल हो गया है। इसे देखते हुए यह 2100 रुपए मकर संक्रान्ति तक बन सकता है।

मक्की का उत्पादन क्षेत्रवार अलग-अलग महीने में होता है तथा *खरीफ सीजन की मक्की के बाद पांच महीने का लम्बा गैप बिहार की फसल में रहता है।* यही कारण है कि पूरी जनवरी तक तेजी का समय रहता है। इस बार की स्थिति यह है कि
यूपी की मक्की पिछले सितम्बर में आई थी, वह माल उत्पादन में भारी कमी होने से एमपी-राजस्थान के माल आने से पहले ही निबट गया था तथा एमपी-छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान की मक्की इस समय चल रही है तथा उक्त *तीनों राज्यों का माल भी रैक लोडिंग के लिए मांग के अनुरूप नहीं मिल रहा है।*
दूसरी ओर पूरा हरियाणा-पंजाब खाली है। उधर *स्टॉर्च मिलों में भी गत वर्ष सीजन ऑफ होने पर मंदा देखकर स्टॉक इस बार कम हुआ है।* स्टॉर्च में भारी तेजी आ गयी है क्योंकि *घरेलू मांग के साथ-साथ निर्यात में काफी माल जा रहा है।*
मक्की का भी निर्यात बंगाल के दोनों बंदरगाहों से निरंतर चल रहा है।
नेपाल की भी लिवाली खगड़िया लाइन से हो रही है। यही कारण है कि मक्की 50 रुपए और उछलकर 1945/1950 रुपए *राजपुरा पहुंच* के लिए बिक गयी। इधर पानीपत-सफीदों के लिए 1945 रुपए दो प्रतिशत सीडी में व्यापार हो रहा है।
इस समय एमपी-छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान से लोडिंग चल रही है। *बिहार की मक्की अप्रैल-मई में आएगी।* उससे पहले कोई माल आने वाला नहीं है।
*वैश्विक बाजारों में घरेलू मक्की के भाव नीचे होने से निर्यात पडते लग रहे हैं।* इसे देखते हुए जो मक्की 1950 रुपए राजपुरा पहुंच में बिकी है, उसके भाव 2100 रुपए एक महीने के अंतराल ही बन सकते हैं।

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